How to complain?

नई दिल्ली। पुलिस थाने और अस्पताल से हर आदमी का पाला कभी ना कभी जरूर पड़ता है। पर कम जानकारी और कानूनी पहलुओं की अनदेखी से आपका केस मजबूत होते हुए भी मात खानी पड़ जाती है। आईए जानते हैं ऎसी कुछ शुरूआती कानूनी प्रक्रियाओं के बारे में जो एफआईआर से शुरू होती है।
किसी भी अपराध की रिपोर्ट पुलिस को दर्ज करवाने के लिए जैसे ही आप थाने में जाते हैंए तो आपको अपने साथ घटे अपराध की जानकारी देने को कहा जाता है। इसमें अपराध का समयए स्थानए मौके की स्थिति इत्यादि की जानकारी पूछी जाती है।
यह सारी जानकारी डेली डायरी में लिखी जाती है। इसे रोजनामचा भी कहा जाता है। बहुत से अनजान लोग इसे ही एफआईआर समझ लेते हैं और अपनी तरफ से संतुष्ट हो जाते हैं। लेकिन इससे आपका मकसद हल नहीं होता है और इस बात की कोई गारंटी नहीं होती कि आपके मामले पर पुख्ता कार्यवाही होगी ही।
ऎसे एक उदाहरण के जरिए समझा जा सकता है। मान लीजिए आपकी गाड़ी चोरी हो गई और अब आप अपनी इंश्योरेंस कम्पनी से इसका क्लेम चाहते हैं। गलती से आपने केवल थाने की डेली डायरी में ही रिपोर्ट दर्ज करवाई है और एफआईआर नहीं ली है। जब आप इंश्योरेंस कम्पनी के पास जाएंगेए तो वे आपसे एफआईआर की कॉपी मांगेंगे और आपका स्थिति देखने वाली होगी। इस तरह के क्लेम के लिए एफआईआर कॉपी संलग्न करना जरूरी होता है। इसके अलावा एक और कानूनी पहलू है जिसे समझना बेहद जरूरी है। विशेषकर गाड़ी चोरी हो जाने के मामले में एएफआईआर दर्ज करवाने का समय भी बहुत मायने रखता है। अगर आपने एफआईआर दर्ज करवाने में 24 घंटे से ज्यादा का समय लगा दियाए तो भी आपका क्लेम खतरे में पड़ सकता है। देरी से एफआईआर दर्ज करवाने का कारण भी आपको देना होगा। इसलिए जब भी अपराध की रिपोर्ट दर्ज करवाएं एफआईआर लिखवाएं और इसकी कॉपी लेंए यह आपका अधिकार है। एफआईआर दर्ज करने में लापरवाही और देरी के लिए भी आप जिम्मेदार अधिकारी की शिकायत कर सकते हैं। एफआईआर की पहचान के लिए इस पर एफआईआर नंबर भी दर्ज होते हैं जिससे आगे इस नंबर से मामले में प्रक्रिया चलाई जा सके। सर्वोच्च न्यायालय ने बताया अनिवार्य पिछले वर्ष ही सर्वोच्च न्यायालय ने प्राथमिकी यानि की एफआईआर दर्ज करने को अनिवार्य बनाने का फैसला दिया है। एफआईआर दर्ज नहीं करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश भी न्यायालय ने दिया है। न्यायालय ने यह भी व्यवस्था दी है कि एफआईआर दर्ज होने के एक सप्ताह के अंदर प्राथमिक जांच पूरी की जानी चाहिए। इस जांच का मकसद मामले की पड़ताल और गंभीर अपराध है या नहीं जांचना है। इस तरह पुलिस इसलिए मामला दर्ज करने से इंकार नहीं कर सकती है कि शिकायत की सच्चाई पर उन्हें संदेह है।
ये है आपका अधिकार

  • संज्ञेय अपराध के मामलों में तुरंत एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है।
  • एफआईआर की कॉपी लेना शिकायकर्ता का अधिकार
  • है। इसके लिए मना नहीं किया जा सकता है।
  • संज्ञेय अपराध की एफआईआर में लिखे गए घटनाक्रम व अन्य जानकारी को शिकायकर्ता को पढ़कर सुनाना अनिवार्य है। आप सहमत हैंए तो उस पर हस्ताक्षर किए जाने चाहिए।
  • यह जरूरी नहीं कि शिकायत दर्ज करवाने वाले व्यक्ति को अपराध की व्यक्तिगत जानकारी हो या फिर उसके सामने ही अपराध हुआ हो।
  • एफआईआर में पुलिस अधिकारी स्वयं की ओर से कोई भी शब्द या टिप्पणी नहीं जोड़ सकता है।

एफआईआर दर्ज नहीं करें तो करें

  • अगर थानाधिकारी आपकी शिकायत की एफआईआर दर्ज नहीं करता है या मना करता हैए तो आप अपनी शिकायत रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से क्षेत्रीय पुलिस उपायुक्त को भेज सकते हैं। उपायुक्त आपकी शिकायत पर कार्रवाई शुरू कर सकता है।
  • इसके अलावा एफआईआर नहीं दर्ज किए जाने की स्थिति में आप अपने क्षेत्र के मैजिस्ट्रेट के पास पुलिस को दिशा.निर्देश के लिए कंप्लेंट पिटीशन दायर कर सकते हैं कि 24 घंटे के भीतर केस दर्ज कर आपको एफआईआर की कॉपी उपलब्ध करवाए।
  • मजिस्ट्रेट के आदेश पर भी पुलिस अधिकारी समय पर शिकायत दर्ज नहीं करता है या फिर एफआईआर की कॉपी उपल्बध नहीं करवाता हैए तो उस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई और जेल भी हो सकती है।

ये भी हैं काम की बातें

  • एफआईआर की कॉपी पर उस पुलिस स्टेशन की मोहर और थानाधिकारी के हस्ताक्षर होने चाहिए।
  • एफआईआर की कॉपी आपको देने के बाद पुलिस अधिकारी अपने रजिस्टर में लिखेगा कि सूचना की कॉपी शिकायतकर्ता को दे दी गई है।
  • आपकी शिकायत पर हुई प्रगति की सूचना संबंधित पुलिस आपको डाक से भेजेगी।
  • आपको और पुलिस को सही घटना स्थल की जानकारी नहीं हैए तो भी चिंता की बात नहीं। पुलिस तुरंत एफआईआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर देगी। हालांकि जांच के दौरान घटना स्थल का थानाक्षेत्र पता लग जाता है तो संबंधित थाने में केस को ट्रांसफर कर दिया जाएगा। 5ण् एफआईआर दर्ज करवाने का कोई शुल्क नहीं लिया जाता है। अगर आपसे कोई भी एफआईआर दर्ज करवाने के नाम पर रिश्वतए नकद की मांग करेए तो उसकी शिकायत करें।

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